सिकंदर को किसने हराया ?

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सिकंदर को किसने हराया ?
©Cover Bharat

सिकंदर को किसने हराया यह बात लोग नहीं जानते क्योंकि हमें इतिहास में यूनानियों द्वारा लिखा इतिहास ही पढ़ाया जा रहा है | हमने भारतीय , चीनी और ईरानी इतिहासकारो के द्वारा लिखा इतिहास नहीं पढ़ा |

इतिहास में पढ़ाया जाता है कि सिकंदर कभी कोई भी युद्ध नहीं हारा और अपने अंतिम युद्ध में सिकंदर ने पोरस को हरा दिया था | यह बात यूनानी इतिहासकार कहते है लेकिन ईरानी , चीनी और भारतीय इतिहासकार कुछ और ही कहते है |

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सिकंदर का अपने जीवन का अंतिम युद्ध भारतीय राजा पुरु / पोरस के साथ हुआ था | पोरस का साम्राज्य झेलम से लेकर चेनाब नदी तक विस्तारित था |

सिंधु और झेलम को पार किये बिना पुरु के राज्य में कदम रखना अत्यंत मुश्किल था | इतिहासकार कहते है की पुरु को अपनी हस्तिसेना और वीरता पर विश्वास था लेकिन उन्होंने सिकंदर को झेलम नदी पार करने से नहीं रोका या उनकी भूल थी। लेकिन नदी पार करने के बाद सिकंदर बुरी तरह फस गए थे क्योकि नदी में बाढ़ आ गयी थी |

जब सिकंदर ने आक्रमण किया तो गांधार तक्षशिला के राजा आम्भी ने सिकंदर का स्वागत किया क्योकि आम्भी पुरु को अपना शत्रु मानते थे | सिकंदर ने पुरु को समर्पण करने का सन्देश पहुंचाया लेकिन पुरु ने उनकी अधीनता नहीं स्वीकारी |

योजना के अनुसार सिकंदर को पूरा विश्वास था की वह युद्ध जीत जायेंगे | पुरु के शत्रु आम्भी की सेना के साथ सिकंदर ने झेलम पार की | राजा पुरु अपनी शक्तिशाली गजसेना के साथ सिकंदर की सेना पर टूट पड़े | पुरु की सेना ने सिकंदर की सेना का बहुत बुरी तरह संहार किया | यह देख कर सिकंदर आतंकित हो उठे थे |

युद्ध में पहले दिन सिकंदर की सेना को जमकर टक्कर मिली | सिकंदर की सेना भयभीत हो उठी थी लेकिन फिर भी सिकंदर अपनी हठ पर अड़ा रहा और अपनी विशिष्ट अंगरक्षक और टुकड़ी को लेकर बीच युद्ध क्षेत्र में घुस गए | सभी भारतीय सेनापति हाथी पर थे इसलिए उन्हें कोई खतरा नहीं था , पुरु की तो बहुत दूर की बात थी | राजा पुरु के भाई अमर ने सिकंदर के घोड़े को अपने भाले से मार डाला और सिकंदर को जमीन पर गिरा डाला | सिकंदर की सेना ने ऐसा होते हुए कभी नही देखा था |

सिकंदर के गिरने पर राजा पुरु अपनी तलबार लेकर सिकंदर के सामने खड़े हो गए | सिकंदर अब पलभर का मेहमान था , तभी राजा पुरु ठिठक गए | यह दर नहीं था , आर्य राजा का क्षत्रिय धर्म था | सिकंदर अपने अंगरक्षक के साथ भाग खड़े हुए | सिकंदर अपने जीवन का अंतिम युद्ध हार गए | पुरु ने सिकंदर को इतनी क्षति पहुंचे कि सिकंदर अपने घर जाते समय बीच रास्ते में बेबीलोन में ही मर गए|


कई भारतीय इतिहासकार मानते है कि पुरु और सिकंदर का कभी युद्ध ही नहीं हुआ उनकी सेना इतने युद्ध लगने के कारण थक गयी थी और इसलिए वह वापिस लौट गए | लेकिन इतिहासकारो द्वारा लिख दिए गए इतिहास में कितनी सच्चाई है यह हम नहीं जानते ,अलग-अलग इतिहासकारो ने पुरु और सिकंदर के बारे में अलग-अलग बात रखी है | कई इतिहासकार कहते है कि अगर सिकंदर पुरु से युद्ध जीत गए थे तो सिकंदर ने अपने राज्य का विस्तार भारत में क्यों नहीं किया ? और यह अच्छा प्रश्न भी है |

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